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मोहतरमा को और भी हैं काम...

Posted On: 30 Jun, 2011 Others में

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आज जब यह पोस्ट कर रहा हूं तो मेरे जेहन में कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी और अन्ना हजारे की मुलाकात नहीं हो पाने की बात है। एजेंसी की खबरों में चल रहा है कि 10 जनपथ से टीम अन्ना ने टाइम नहीं लिया था। यदि यह खबर सत्य है तो सिविल सोसाइटी को अपना भ्रम खत्म कर लेना चाहिए। सरकार और सुपर सरकार के अपने-अपने इकबाल हैं, व्यस्तताएं हैं। कोई जनता के तथाकथित नुमाइंदों से क्यों कर मिलेगा। कपिल सिब्बल साहब पहले ही कह चुके हैं कि सिविल सोसाइटी को भाव देकर गलती हो गई। इसलिए शायद अब मैडम ने भी साफ कर दिया कि -अन्ना जैसों की कोई कीमत नहीं है उनके दरबार में। आखिर वे जनता के नुमाइंदे तो हैं नहीं…, ऐसे में मैडम ने जो कुछ किया-गलत नहीं किया। गलत तो हमेशा पब्लिक करती है, आज टीम अन्ना वाले कर रहे हैं। एक दिन पहले ही मनमोहन जी ने कह दिया है कि वह असहाय नहीं हैं, जब तक उनकी सहाय सोनिया जी हैं अऱे वही तो हम सभी की सहाय हैं , अगर वह लोकपाल बिल का ड्राफ्ट देखने में वक्त देंगी तो हम गरीबों की सुधि कौन लेगा। प्रणब दा तो साफ कर चुके हैं कि डीजल-किरोसिन रसोई गैस के दाम नहीं घटेंगे, मैडम इस मामले को देखेंगी तो हो सकता है हमारा कुछ भला हो जाए। वैसे मेरा निजी मत यह है कि शायद इसके लिए भी उनके पास वक्त नहीं होगा। 2004 में जब चुनाव आएगा तब हो सकता है कि वह कुछ वक्त निकाल लें- फिर हम सुनेंगे—अबकी बार 10 दिन में महंगाई कंट्रोल में कर लेंगे। कांग्रेस का हाथ—गरीबों के साथ।( संभवतः उन्हें सदा गरीब बनाए रखने के लिए)। तब विपक्ष के कुछ नेता इच्छा मृत्यु के लिए राष्ट्रपति को चिट्ठी भेंजेगे, राष्ट्रपति उसे वापस भेज देंगी, यह कहते हुए कि आपसे ज्यादा गरीब कौन हैं, आप सुसाइड न करें। देश को आप जैसे नेताओं की जरूरत है, जय लोकतंत्र।

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